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बैंक प्राइवेटाइजेशन एक सही चीज है या एक घोटाला है।बैंक निजीकरण क्या है?

हेलो दोस्तों आज हम बैंक प्राइवेटाइजेशन यानी बैंको के निजीकरण के बारे में बात करेंगे। बैंक प्राइवेटाइजेशन एक सही चीज है या एक प्रकार से घोटाला है। इन सारी बातों के बारे में हम इस ब्लॉग में जानेंगे।

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दोस्तों बात शुरू होती है जब हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था एक गवर्नमेंट को हर सेक्टर में सिर्फ एक को छोड़कर बाकी सारी कंपनियां प्राइवेट कर देनी चाहिए। बाद में नीति आयोग ने बैंक पंजाब और सिंध बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र को बेचने का सुझाव दिया था। उसके बाद में आरबीआई के एक डायरेक्टर ने कहा था कि गवर्नमेंट को बैंको में सिर्फ 26% शेयर रखने चाहिए। जिसका मतलब भी प्राइवेट करना होता है।

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बैंकों का नेशनलाइजेशन हुआ क्यों था?

दोस्तों 51 साल पहले सरकार ने बैंकों को नेशनलाइज किया था। यानी सरकार ने बैंकों को अपने अधीन में ले लिया था। जिसका मेन मकसद यही था की बैंकों की सुविधाएं हर आदमी के पास पहुंची चाहिए। बैंक नेशनलाइजेशन के पहले बैंकों का रेगुलेशन कुछ कॉरपोरेट हाउस कि लोगों के पास था

जिससे ये लोग सिर्फ बैंकों से मुनाफे के बारे में सोचते थे। ना तो किसानों को लोन मिल पाता था और ना कृषि सेक्टर में किसी भी तरह की बैंकिंग सर्विसेस मिल पाती थी। पहले लोग इन बैंकों में अपना पैसा रखते थे और ये लोग उनका पैसा लेकर भाग जाते थे। यह कह देते थे की बैंक घाटे में चला गया है। बैंक फेल हो गया है। और बैंक को बंद कर देते थे। जिससे लोगों को बहुत नुकसान होता था। और कोई कुछ कर भी नहीं सकता था क्योंकि ये प्राइवेट बैंकें थी।

बैंकों के नेशनलाइजेशन के बाद क्या हुआ?

दोस्तों बैंकों के नेशनलाइजेशन होने के बाद बैंकों की सर्विसेस सब के पास पहुंचने लगी। जिससे आम लोगों को भी बैंकों का फायदा होने लगा। कृषि सेक्टर को भी बढ़ने का मौका मिला क्योंकि किसानों को अब लोन और बैंकिंग सेवाएं मिल जाती थी। गरीब भी इन बैंकों का फायदा ले सकता था। कम लेकिन सेवाएं मिलती थी। छोटे शहरों और गांव में ब्रांच खोली गई।

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प्राइवेट और गवर्नमेंट सेक्टर कि बैंकों का रोल क्या होता है?

प्राइवेट सेक्टर की बैंक के सिर्फ मुनाफा देखती हैं लेकिन गवर्नमेंट सेक्टर की बैंक के हमेशा मुनाफा नहीं सोचती वह विकास की तरफ ज्यादा ध्यान देती हैं। प्राइवेट सेक्टर कॉरपोरेट हाउस की तरफ ज्यादा ध्यान देती हैं लेकिन पब्लिक सेक्टर की बैंक आम लोगों की तरफ भी ध्यान देती हैं।

बैंको का निजीकरण का समर्थन देने वालों का तर्क क्या होता है:-

दोस्तों जो लोग निजीकरण का समर्थन करते हैं। उनका अक्कसर यही तर्क होते हैं- जैसे बैंकिंग सेक्टर में प्राइवेट बैंक्स में आपको सुविधा ज्यादा मिलती है। ऑफिस साफ-सुथरे रहते हैं। ऑफिस में एम्पलाई ज्यादा मेहनत करते हैं। वहां के एम्पलाई आपसे तमीज से बात करते हैं। एंप्लॉय आपके पास खुद हेल्प करने आते हैं क्योंकि उनको मुनाफा कमाना होता है।

प्राइवेट सेक्टर बैंक में खराब लोन कम होते हैं। और भी कई चीजें होती है। और वहीं पर पब्लिक सेक्टर के बैंकों में काम सही से नहीं होता है। काम समय पर नहीं होता है। काम करने वाले लोगों का रवैया ठीक नहीं होता है। खराब लोन ज्यादा होता है।

इन सभी तर्कों पर मेरी राय-

दोस्तों माना कि पब्लिक सेक्टर बैंक में सर्विस सही टाइम पर सही नहीं मिलती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है पब्लिक सेक्टर बिल्कुल खराब होती है। सर्विस कभी-कभी प्राइवेट सेक्टर में भी नहीं मिलती हैं। जैसे एटीएम में पैसे नहीं होना,सरवर का ना आना और भी कई चीजें हैं।

और आपको बता दें क्या आपने यस बैंक घोटाला तो सुना ही होगा क्योंकि यह बहुत बड़ा घोटाला था और प्राइवेट बैंक का था। HDFC जो कि एक बड़ी प्राइवेट सेक्टर बैंक है उसमें भी लोन में गड़बड़ी पाई गई। जिसमे इंक्वायरी भी बैठी और आरबीआई ने कहा था की एचडीएफसी अपनी डिटेल सही और टाइम पर नहीं देते हैं।

सरकारी बैंकों में सबकी दखलअंदाजी-

पब्लिक सेक्टर बैंक कोई काम ना होने का एक बड़ा कारण यह भी है इसमें सब की दखलअंदाजी होती है। फिर चाहे बाबू हो, मैनेजर हो या लोकल नेता हो। सब अपनी दखलअंदाजी करते रहते हैं। जिसके कारण आम लोगों को दिक्कतें और बैंकों में भी काम सही नहीं होता है।

निष्कर्ष-

दोस्तों पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर अगर दोनों को कंपेयर करें तो दोनों में गड़बड़ियां होती हैं। दोनों में दिक्कतें होती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्राइवेट सेक्टर बैंक ही अच्छे होते हैं। जो सर्विस आपको पब्लिक सेक्टर में मिल जाएंगी वह सर्विस आपको प्राइवेट सेक्टर में नहीं मिलेगी। सबसे जरूरी बात पब्लिक सेक्टर बैंक में आपका पैसा सुरक्षित रहता है लेकिन प्राइवेट सेक्टर बैंक में आपका पैसा डूबने का डर भी रहता है। क्योंकि वहां सरकार का कोई इंटरफेयर नहीं होता है। और जो लोग पब्लिक सेक्टर की बैंकों को बेचने का सुझाव दे रहे हैं वही लोगों ने पब्लिक सेक्टर का यह हाल किया है।

आपको बता दें या आपने सुना भी है की यस बैंक कितनी बुरी तरीके से फेल हुई लेकिन फिर उसको संभाला किसने एक पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई ने और सबको पता है कि अभी एसबीआई की हालत क्या है।

तो दोस्तों मेरी राय में निजी करण एक प्रकार से घोटाला ही है। क्योंकि सारा पैसा फिर से कॉरपोरेट के हाथ में जाएगा और फिर वह ही बैंकों को रेगुलेट करेंगे। जिससे वही पुराना सिस्टम शुरू हो जाएगा ना तो गरीबों को लोन, ना तो कृषि सेक्टर को बैंकिंग की सुविधाएं अच्छी मिलेंगी।

आपकी राय निजीकरण को लेकर क्या है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और ब्लॉग पसंद आया हो तो लाइक भी करना। लेकिन कमेंट जरूर करें। मिलते हैं अगले ब्लॉग में धन्यवाद

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