Home Important topics Hung Parliament kya hota hai| त्रिशंकु लोकसभा किसे कहते हैं?

Hung Parliament kya hota hai| त्रिशंकु लोकसभा किसे कहते हैं?

हेलो दोस्तों आज हम त्रिशंकु लोकसभा (hung Parliament)  क्या होती है? यह कैसे काम करती है? इसके बारे में जानेंगे कि हंग पार्लियामेंट कब बनती है इसके रूल क्या है इन सब चीजों के बारे में हम अपने इस ब्लॉग में समझेंगे। तो आइए शुरू करते हैं।

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हंग पार्लियामेंट क्या होती है?

जब कोई एक पार्टी या चुनाव से पूर्व बने गठबंधन के पास 272 का सरकार बनाने वाला आंकड़ा नहीं होता है तब इसे Hung Parliament कहते हैं। जिसे हम हिंदी में और राजनीतिक भाषा में त्रिशंकु लोकसभा कहते हैं।

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जैसे चुनाव से पहले बने गठबंधन यानी UPA और NDA जैसी पार्टी के पास यदि 50% से ज्यादा सीट नहीं होंगी जोकी जीत के लिए जरूरी है। तो इस स्थिति में उस लोकसभा को हंग पार्लियामेंट या त्रिशंकु लोकसभा कहेंगे।

त्रिशंकु लोकसभा(Hung Parliament) का हल क्या है?

जब हंग पार्लियामेंट वाली स्थिति आती है। तब इसका समाधान देश का राष्ट्रपति करता है। जब यह बात पक्की हो जाती है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी या चुनाव से पहले बने गठबंधन के पास सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं है तो देश के राष्ट्रपति इसका हल निकालने के लिए यह विकल्प चुन सकते हैं

जैसे राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े गठबंधन बने चुनाव से पूर्व से बुला सकते हैं। सरकार को बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी के नेता को भी निमंत्रण दिया जा सकता है। अगर यह भी काम ना करें तो फिर चुनाव के बाद बने गठबंधन को निमंत्रण सरकार बनाने का दिया जा सकता है।

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राष्ट्रपति का क्या रोल होता है

राष्ट्रपति त्रिशंकु लोकसभा को सही करने मैं अहम भूमिका निभाता है जैसे यदि देश के राष्ट्रपति को लगता है कि पार्टी या बने गठबंधन के पास एक सही और स्थाई सरकार स्थापित करने के लिए सही आंकड़े हैं। तब नए चुनाव होने से रोका जा सकता है। परंतु यदि राष्ट्रपति के पास यह सारे ऑप्शन नहीं होते हैं और कोई भी पार्टी या गठबंधन सरकार स्थापित करने के लिए अपने आंकड़े प्रूफ नहीं कर पाती है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

यह शासन लगभग 6 महीनों तक चलाया जा सकता है। इस समय में पार्टी को या गठबंधन को अपने जीत के आंकड़े को दोबारा से प्रूफ करने और सरकार स्थापित करने के लिए दूसरा मौका मिल जाता है। लेकिन यदि इस समय में भी कोई पार्टी आंकड़े प्रूफ नहीं कर पाती है तब नए चुनाव की घोषणा करी जा सकती है।

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क्या कभी हंग पार्लियामेंट बनी है?

हां दोस्तों कई बार हंग पार्लियामेंट या त्रिशंकु लोकसभा बनाई गई है। जैसे-1999 के लोकसभा इलेक्शन में BJP-LED NDA ने 269 सीट प्राप्त की थी मतलब बहुमत नहीं था। लेकिन TDP पार्टी के सपोर्ट से बीजेपी ने 5 साल तक सरकार चलाई और यह सरकार भारत के 13वें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की थी। उसी तरह 2004 के लोकसभा इलेक्शन में Congress-LED UPA को 218 सीटें प्राप्त हुई थी। मतलब बहुमत इनके पास भी नहीं था तब भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सोनिया गांधी को इनवाइट किया था सरकार बनाने के लिए।

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क्या Hung Parliament जो सपोर्ट देते हैं वह अपना सपोर्ट वापस भी ले सकते हैं?

जी हां दोस्तों जब कोई पार्टी अपना सपोर्ट किसी बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए देती है तो उसके पास सपोर्ट वापस लेने का भी पावर होता है। जैसे 1998 में बीजेपी 182 सीटों से जीती थी और उसने सरकार गठबंधन करके बनाई थी। लेकिन 1 साल के अंदर ही सरकार गिर गई क्योंकि AIADMK ने अपना सपोर्ट वापस ले लिया था। और सरकार भंग हो गई थी।

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