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Starting story of indian constitution| Indian constitution kese bana

संविधान का निर्माण(indian constitution)

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indian constitution  (संविधान सभा) के सिद्धांत के सर्वप्रथम दर्शन 1895 के ‘स्वराज्य’ विधेयक में होते हैं, जिसे तिलक के निर्देशन में तैयार किया गया था। 20 वीं सदी में इस विचार की ओर सर्वप्रथम संकेत महात्मा गांधी ने किया, जब 1922 में उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छा अनुसार ही होगा।(indian constitution in hindi)
सन् 1924 में पंडित मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सम्मुख संविधान सभा के निर्माण की मांग प्रस्तुत की, किंतु उस समय सरकार की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया इसके बाद इसे मूर्त रूप देने का कार्य पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया। प्रमुखता उन्हीं के प्रयत्नों से कांग्रेस ने औपचारिक रूप से घोषणा की थी कि यदि भारत को आत्म निर्णय का अवसर मिलता है तो भारत के सभी विचारों के लोगों की प्रतिनिधि सभा बुलाई जानी चाहिए, जो सर्वसम्मत संविधान का निर्माण कर सके। यही संविधान सभा होगी।
सन् 1927 में साइमन कमीशन की नियुक्ति करते समय अंग्रेज सरकार में तत्कालीन भारत मंत्री वर्कनहेड ने यह चुनौती दी भारतवासी खुद अपना संविधान बनाने के लिए योग्य एवं सक्षम नहीं है, तथा इसलिए भारतीय प्रशासन में आवश्यक है फिर करने के लिए उन्हें स्वयं कमीशन की नियुक्ति करनी पड़ रही है। भारतीयों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कांग्रेस की ओर से फरवरी, 1928 में दिल्ली में एक सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय संविधान के लिए आवश्यक रिपोर्ट बनाने हेतु एक कमेटी का गठन किया गया। 9 सदस्यों वाली इस कमेटी के अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू और सचिव पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इस कमेटी ने लंबे विचार-विमर्श के उपरांत अपनी रिपोर्ट दी, जिसे नेहरू रिपोर्ट कहते हैं, लेकिन अंग्रेज सरकार ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया।
अगस्त 1940 में प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार ने कहा कि भारत का संविधान खुद भारतवासी ही तैयार करेंगे। इसके बाद 1942 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल नेसर स्टेफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में एक मिशन भारत भेजा, लेकिन भारत वासियों द्वारा अन्य महत्वपूर्ण आधारों पर क्रिप्स योजना को अस्वीकार कर दिया गया। अंत में 1946 की कैबिनेट मिशन योजना में भारतीय संविधान सभा के प्रस्ताव को स्वीकार कर इसे व्यवहारिक रूप से प्रदान कर दिया गया।
24 मार्च, 1946 को कैबिनेट मिशन दिल्ली पहुंचा। 16 मई, 1946 को मिशन ने अपनी योजना प्रकाशित की। संविधान निर्माण के प्रस्तावित संगठन के बारे में मिशन का विचार था की व्यस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा का गठन वर्तमान स्थितियों में असंभव है। अता व्यावहारिक उपाय यही है की प्रांतीय विधानसभाओं का निर्वाचन कारी संस्थाओं के रूप में उपयोग किया जाए।
कैबिनेट मिशन की योजना के अनुसार संविधान सभा के कुल 389 स्थानों में ब्रिटिश भारत (देसी रियासतों को छोड़कर शेष भारत) को 296 स्थान तथा देशी रियासतों को 93 स्थान दिए गए। जुलाई, 1946 में 296 स्थानों के चुनाव हुए। कांग्रेस को 208 स्थानों पर विजय प्राप्त हुई। मुस्लिम लीग को 73 स्थान मिले तथा 8 स्थानों पर स्वतंत्र उम्मीदवारों ने विजय प्राप्त की। शेष 7 पर अन्य छोटे दलों को विजय प्राप्त हुई। संविधान सभा में महात्मा गांधी और जिन्ना को छोड़कर उस समय के सभी महत्वपूर्ण व्यक्ति थे।
संविधान सभा में अपनी स्थिति निर्बल देखकर मुस्लिम लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार किया और 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन में मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि सम्मिलित नहीं हुए। संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में प्राप्त हुआ। डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को सर्वसम्मति से अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर 1946 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष निर्वाचित हुए।13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्ताव पेश किया तथा 22 जनवरी, 1947 को पारित कर दिया गया।
प्रारूप समिति ने भारत का जो प्रारूप संविधान तैयार किया, वह फरवरी, 1948 में संविधान सभा के सम्मुख अध्यक्ष को सुपुर्द किया गया। प्रारूप संविधान के प्रकाशित होने के बाद प्रारूप संविधान के संशोधन के लिए अनेक सुझाव प्राप्त हुए। 15 नवंबर 1948 को प्रारूप संविधान पर धारावार विचार प्रारंभ हुआ। 8 जनवरी, 1949 तक संविधान सभा 67 अनुच्छेदों पर विचार कर चुकी थी। इसे प्रथम वाचन कहा जाता है क्योंकि इस कालावधी में संविधान पर सामान्य वाद विवाद हुआ। 16 नवंबर, 1949 को संविधान का द्वितीय वचन समाप्त हो गया ।संविधान का तीसरा वाचन नवंबर 1949 तक चला, जबकि संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान को अंतिम रूप से पास कर दिया गया। 26 जनवरी, 1950 को उसका भारतीय गणराज्य की संसद के रूप में अभी भाव हुआ।
संपूर्ण संविधान निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगे। इस कार्य पर लगभग ₹6400000 खर्च हुए। संविधान के प्रारूप पर भी 114 दिन तक चर्चा चलती रही। अपने अंतिम रूप में संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी। संविधान के कुल अनुच्छेद 26 नवंबर, 1949 के दिन लागू कर दिए गए पर शेष संविधान 26 जनवरी के दिन ऐतिहासिक महत्व के कारण जनवरी, 1950 से लागू कर दिए गए। भारत के संविधान में अब तक 78 संशोधन किए गए।

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