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What is Code of Conduct? आचार संहिता चुनाव के लिये क्यो जरूरी है?

दोस्तों, यह तो आप सभी ने सुना होगा कि हमारे यहां पर जब कभी किसी पार्टी के चुनाव होते हैं तो उसके कुछ दिन पहले हमें सुनाई में आता है कि आचार संहिता (Code of Conduct) लगा दी गई है।

आचार संहिता शब्द से हम सभी परिचित हैं, लेकिन यह क्यों लगाई जाती है, कब लगाई जाती है और इसका क्या असर होता है आने वाले चुनाव के ऊपर इसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। आचार संहिता शब्द का पूर्ण रूप से मतलब क्या होता है यह मैं आज के आर्टिकल में आपको बताने वाला हूं।

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Code of Conduct क्या होता है?

आचार संहिता का मतलब होता है किसी एक व्यक्ति विशेष या दल के लिए कुछ नियमों का समूह निर्धारित कर देना यानी कि कुछ नियम बना देना जिनके आधार पर ही व्यक्ति विशेष या दल के द्वारा व्यवहार किया जाएगा।इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं, 

जब हम कोई परीक्षा देने परीक्षा हॉल में जाते हैं वहां पर हमारे लिए एक समय निर्धारित होता है 3 घंटे क। इन 3 घंटों के बाद आपको उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखने की अनुमति नहीं दी जाती है। आपके शिक्षकों को भी एक समय निर्धारित किया जाता है

आपको उत्तर पुस्तिका देने के लिए और प्रश्न पत्र देने का भी एक समय निर्धारित होता है। इन नियमों के समूह का पालन हम सभी को करना पड़ता है चाहे वह शिक्षक हो या छात्र। 

 यह जो समय निर्धारित किया जाता है यह आचार संहिता के अंतर्गत आता है। समय निर्धारण के साथ ही सामाजिक व्यवहार नियम व कुछ जिम्मेदारियां भी आचार संहिता के अंतर्गत आती हैं, इसीलिए इसे आचरण संहिता( Code of Conduct) भी कहा जाता है। 

Code of conduct यानी कि आचार संहिता आपको हर विभाग में देखने को मिल जाती है। हर विभाग के अपने कुछ नियम, कायदे-कानून होते हैं जिनका समूह आचार संहिता यानी कि कोड ऑफ कंडक्ट कहलाता है  जिसका पालन उस विभाग से जुड़े हर व्यक्ति को करना पड़ता है। 

 इसे हम इस तरह से भी समझ सकते हैं कि यह कुछ निर्देशों का समूह होता है जिनका पालन करना हमारे लिए आवश्यक होता है इन निर्देशों के उल्लंघन पर आप दंडित किए जाते हैं।

  चलिए अब चुनावी नजरिए से बात करते हैं कि आचार संहिता क्या होती है?

जैसा कि आपने पढ़ा यह एक नियम या निर्देशों का समूह होता है जिसका पालन इससे जुड़े लोगों को करना पड़ता है।

चुनावी दिनों में सरकार के द्वारा कुछ निर्देश और नियम संगठित किए जाते हैं जिनका पालन चुनाव से जुड़े सभी दलों संगठनों पार्टी या लोगों को करना पड़ता है। इस नियमावली का पालन आवश्यक रूप से करना होता है नहीं तो दंड के अधिकारी बन जाते हैं।

यह निर्देश या नियम सरकार, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों तथा जनता के लिए होते हैं, जिसका पालन चुनाव के दौरान किया जाना आवश्यक रूप से अनिवार्य होता है। चुनावी आचार संहिता चुनाव की दिनांक  घोषणा से लागू होते हैं और मतदान के अंतिम परिणाम आने के बाद ही समाप्त होते हैं। इन नियमों और निर्देशों के अंतर्गत सभी चुनावी दल, संगठन पार्टियां, उम्मीदवार और जनता शामिल होते हैं। 

सभी राजनीतिक दलों को प्रत्यक्ष रूप या अप्रत्यक्ष रूप से इन निर्देशों का पालन करना होता है। यह सभी नियम और निर्देश चुनाव आयोग द्वारा बनाए जाते हैं जिसका कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है। यदि कोई राजनीतिक दल या उम्मीदवार इन नियमों का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग को उसके विरुद्ध कार्यवाही करने का पूरा अधिकार होता है। 

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आचार संहिता कब और कैसे लागू की जाती है?

आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा लागू की जाती है। जिस भी क्षेत्र में चुनाव होने वाले होते हैं तब चुनाव तिथि की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू कर दी जाती है। यह तब तक जारी रहती है जब तक उस क्षेत्र  के चुनावी परिणाम घोषित ना कर दिए जाएं।

इस दौरान सभी  चुनावी दल, उम्मीदवार और जनता जो भी इस क्षेत्र में आते हैं सभी आचार संहिता के अंतर्गत होते हैं और आचार संहिता से जुड़े हुए सभी नियम और निर्देशों का पालन करना उनके लिए आवश्यक होता है।

 Code of Conduct लागू होते ही उस क्षेत्र कि प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई तरह की रोक लगा दी जाती है। उस क्षेत्र के सभी सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं।

आचार संहिता के नियम व निर्देश सभी पर लागू होते हैं यानी कि मुख्यमंत्री, मंत्री और किसी भी तरह के पद पर आसीन मंत्रियों पर भी। 

 चुनावी आचार संहिता के नियम व निर्देश

  1. आचार संहिता लागू होते ही कोई भी दल, संगठन, राजनीतिक पार्टी या कोई भी उम्मीदवार ऐसा कोई काम नहीं कर सकता है जिससे किसी व्यक्ति विशेष की जाति, धर्म या भाषा के आधार पर समुदायों में मतभेद हो। 
  2. किसी भी धार्मिक स्थल यानी कि मंदिर, मस्जिद, चर्च,गुरुद्वारे या कोई भी ऐसा धार्मिक स्थान जो धर्म से जुड़ा हुआ हो का उपयोग राजनीतिक मंच या प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता।
  3. कोई भी ऐसी अपील जारी नहीं की जा सकती है जिससे किसी की भी धार्मिक या जातीय भावनाओं को ठेस पहुंचे।
  4. किसी की अनुमति के बिना उसकी भूमि या भवन का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  5. किसी भी राजनीतिक पार्टी, उम्मीदवार या व्यक्ति विशेष की आलोचना सिर्फ राजनीतिक दल तक ही सीमित रहेगी ना कि व्यक्तिगत की जाएगी। 
  6. मतदाताओं को अपनी पार्टी की ओर आकर्षित करने के लिए कोई किसी भी गलत आचरण जैसे कि रिश्वत देना,डराना,धमकाना या कोई और लालच देना का उपयोग नहीं किया जाएगा। 
  7. अपनी विरोधी पार्टी के किसी भी दल की सभा जुलूस या चुनावी प्रचार प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली जाएगी।
  8. कोई भी राजनीतिक दल या पार्टी अपनी चुनावी प्रचार, सभा के आयोजन के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को देगी। 
  9. सभा में लाउडस्पीकर की अनुमति पुलिस द्वारा पूर्व प्राप्त की जाएगी। 
  10. चुनावी प्रचार रैलियों को निकालने की अनुमति, समय व स्थान के बारे में भी प्रशासन को पूर्व सूचित किया जावेगा। 
  11. रेलियों व सभाओ में किसी भी तरह के हथियार का उपयोग नहीं किया जाएगा।
  12. किसी भी राजनीतिक पार्टी के द्वारा किसी भी तरह का लालच देने की घोषणाएं नहीं की जावेगी। 

 

 आचार संहिता के नियम व निर्देश सभी चुनावी दलों, उम्मीदवारों, राजनीतिक पार्टियों और जनता के लिए होते हैं, जिससे कि बिना किसी रोक-रुकावट के  निष्पक्ष चुनावी परिणाम जारी किए जा सके। यह नियमावली इसीलिए बनाई गई है जिससे कि कोई भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार जनता को डरा धमका कर या लालच देकर अपनी ओर आकर्षित ना कर सके।

आचार संहिता उल्लंघन के परिणाम 

  1. किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के द्वारा प्रथम बार उल्लंघन पर प्रथम चेतावनी दी जाती है। 
  2. दूसरी बार अगर उल्लंघन होता है तो उस राजनीतिक दल या प्रत्याशी को चुनाव प्रचार से बाहर कर दिया जाता है। 
  3. अगर तीसरी बार उल्लंघन किया जाता है तो उस उम्मीदवार या राजनीतिक दल की उम्मीदवारी रद्द कर दी जाती है।
  4. चुनाव आयोग द्वारा उल्लंघन करने पर दो बार चेतावनी जारी की जाती है और तीसरी बार में उस उम्मीदवार की चुनावी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाती है चुनाव आयोग को पूर्ण अधिकार होता है किसी भी उल्लंघन करने वाले राजनीतिक दल या उम्मीदवार को चुनावी दौरे से बाहर कर देने का।

आचार संहिता नियमावली का निर्माण ही इसीलिए किया गया है जिससे कि सभी चुनाव निष्पक्ष रूप से किए जा सके आचार संहिता में कुछ नियमों और निर्देशों के साथ सभी राजनीतिक दलों उम्मीदवारों को पूरा मौका दिया जाता है

उनकी पार्टी के प्रचार के लिए। आचार संहिता लगते ही उस क्षेत्र के सभी अधिकार व अधिकारी चुनाव आयोग के अंतर्गत आ जाते हैं और चुनाव आयोग का इन सभी पर पूर्ण अधिकार हो जाता है।चुनावी परिणाम जब तक घोषित नहीं हो जाते हैं, यह अधिकार बना रहता है और आचार संहिता भी बनी रहती है।

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