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What is FATF and How does it help the country,what is its work

What is FATF and How does it help the country,what is its work

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 क्या है ‘एफएटीएफ’?

जल्दी ही आपने सुना होगा कि एफएटीएफ FATF ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में बनाए रखने का फैसला किया है। भारत ने एफएटीएफ में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कराने यानी काली सूची में ले जाने की कोशिश की। लेकिन चीन, तुर्की और मलेशिया का समर्थन वह पाकर इससे बचने में सफल रहा। एफएटीएफ क्या है? इसकी ग्रे लिस्ट व ब्लैक लिस्ट का मतलब क्या होता है? आइए इसी के बारे में जानते हैं।

‘FATF’ कहते किसे है?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)  एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग जैसे अपराधों की रोकथाम के लिए नीतियां और मानक तैयार करता है। इसकी स्थापना जुलाई 1989 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित G-7 देशों की शिखर बैठक की पहल पर हुई। इसका मुख्यालय पेरिस में है। अभी  एफएटीएफ में 38 सदस्य हैं। जिसमें 2 क्षेत्रीय संगठन- यूरोपीय कमीशन और गल्फ काॅपरेशन काउंसिल शामिल है। साथ ही दो देश- इंडोनेशिया और सऊदी अरब बतौर ऑब्जर्वर शामिल है। भारत 2010 में एफएटीएफ का सदस्य बना।

एफएटीएफ(FATF) का काम क्या है?

एफएटीएफ वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समय-समय पर दिशा निर्देश जारी करता है। एफएटीएफ ने पहली बार 1990 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 1996, 2001 और 2003 में दिशानिर्देश जारी किए। सबसे ताजा दिशानिर्देश 2012 में जारी किए गए हैं। कुल मिलाकर एफएटीएफ ने अब तक 40 दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन दिशानिर्देशों में वे सभी उपाय हैं जिनके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकी जा सके इनमें बैंक खाते और रियल एस्टेट ट्रांजैक्शन के लिए केवाईसी की जरूरत, आर्थिक अपराध की जांच का तंत्र स्थापित करना, आर्थिक अपराधों के संबंध में सूचनाओं का आदान प्रदान करने जैसे उपाय शामिल हैं। एफएटीएफ विभिन्न देशों में इन दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन के लिए किए गए जरूरी उपायों की निगरानी भी करता है।

 ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट क्या है?

जिन देशों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकने का तंत्र नाकाफी है लेकिन उन्होंने एफएटीएफ के दिशा-निर्देशों को लागू करने की प्रतिबद्धता प्रकट की है उन्हें निगरानी सूची यानी ग्रे लिस्ट में रखा जाता है। लेकिन जो देश इस तरह की प्रतिबद्धता नहीं दर्शाते उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है। ऐसे देशों को हाई रिस्क देश भी कहा जाता है इसका मतलब यह है कि उनके साथ किसी भी तरह का आर्थिक लेनदेन करना जोखिम भरा हो सकता है।

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एफएटीएफ अगर किसी देश को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव करता है तो वह तभी बच सकता है जब कम से कम 3 सदस्य उसके पक्ष में हों। पाकिस्तान को भी ब्लैक लिस्ट होने से बचाने के लिए 3 देशों चीन, मलेशिया और तुर्की ने समर्थन दिया है। ईरान और उत्तर कोरिया ब्लैक लिस्ट में है। एक बार किसी देश के ब्लैक लिस्ट में जाने के बाद अन्य देश उसके साथ कारोबार करने में ड्यू डिजिलेंस बढ़ा देते हैं या बंद कर देते हैं। जिससे उसके आर्थिक हितों पर कड़ी चोट पहुंचती है। पाकिस्तान सहित करीब दर्जनभर देश फिलहाल एफएटीएफ की निगरानी सूची में है।

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