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What is leverage ratio and full Explaination in hindi

          लिवरेज रेश्यो क्या होता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले हफ्ते बैंकों के लिए न्यूनतम लीवरेज रेश्यो leverage ratio घटाने की घोषणा की है।  लीवरेज रेश्यो होता क्या है? आइए इसे ही समझते हैं।

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 बैंकों के नियमन से संबंधित बासेल तृतीय नियमों में लीवरेज रेश्यो की परिभाषा दी गई है। बैंकों के एक्सपोजर (वितरित कर्ज) की तुलना में टीयर-1 कैपिटल का अनुपात है।   लीवरेज रेश्यो निकालने के लिए बैंक की tier-1 कैपिटल में कुल एक्स्पोज़र से भाग देने से जो उत्तर आता है उसमें 100 से गुणा करने पर फीसद के रूप में लेवरेज रेशों प्राप्त होता है।

Example of leverage ratio-

उदाहरण के लिए किसी बैंक की टियर-1 कैपिटल 4.5 करोड़ रुपए है जबकि उसका एक्स्पोज़र 100 करोड़ रुपए है तो उसका  लीवरेज रेश्यो 4•5 फीसद होगा। अगर बैंक tier-1 कैपिटल का स्तर सामान रखते हुए लीवरेज रेश्यो को घटाना चाहती है, तो वह एक्सपोजर बढ़ा सकती है यानी ज्यादा कर्ज वितरित कर सकती है। इस उदाहरण में अगर हम लीवरेज रेश्यो को घटाकर चार की छत पर लाना चाहते हैं तो एक्स्पोज़र बढ़ाकर 112•5 करोड़ करना होगा।  बासेल नियमों के अनुसार बैंकों को लिवरेज  रेश्यो  कम से कम 3 फीसद रखना होता है। बैंकों में लीवरेज रेश्यो पर कैपिटल और एक्स्पोज़र के आधार पर ही नजर रखी जाती है। एक्सपोजर में बैंक के बैलेंस शीट और उसके बाहर दोनों प्रकार के एक्सपोजर शामिल होते हैं।

टियर-1

यहां टियर-1 कैपिटल का आशय  समझना भी जरूरी है। टियर फर्स्ट पूंजी किसी बैंक की फंडिंग का प्राथमिक स्रोत होती है। बैंक अपने जोखिम भरे लेनदेन के वक्त काम चलाने के लिए इस पूंजी को जमा रखता है।ये ऐसी परिसंपत्तियों होती हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर नगदी में तब्दील किया जा सकता है।
यही वजह है कि नियामक संस्थाएं भी बैंकों की टीयर फर्स्ट कैपिटल पर नजर रखती हैं, क्योंकि इससे उनकी वित्तीय क्षमता का पता चलता है। लीवरेज रेश्यो इसलिए अहम है क्योंकि वर्ष 2007-0 8 में वैश्विक वित्तीय संकट का एक कारण बैंकिंग प्रणाली में लिवरेज रेश्यो का काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचना था। इसके बाद पूरी दुनिया में आर्थिक संकट गहराया था। यही वजह है कि बैंकों को बासेल नियमों का पालन करते हुए 2015 से हर तिमाही में लिवरेज रेश्यो की जानकारी देनी होती है।

Reserve Bank Action-

रिजर्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता और बासेल मानकों को ध्यान में रखते हुए  लीवरेज रेश्यो घटाकर महत्वपूर्ण बैंकों के लिए 4 फीसद और अन्य के लिए 3•5  फीसद करने का फैसला किया है। अब तक लिवरेस 4•5 फीसद था। आरबीआई जून के अंत में इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।  लीवरेज रेश्यो घटाने से बैंक कर्ज बांटने की गतिविधियां बढ़ा सकते हैं।
इससे उन बैंकों को भी फायदा होगा जो फिलहाल आरबीआई के प्रांप्त करेक्टिव एक्शन यानी पीसीए नियमों के दायरे में है।  आरबीआई किसी बैंक को पीसीए में डालने से पहले जिन चार  संकेतों को देखता है उसमें लिवरेज लरेश्यो भी एक है।
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