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Misogyny Kya hai? Full detail knowledge about Misogyny in Hindi

हैलो दोस्तो आज हम Misogyny पर बात करेंगे। इस टाॅपिक पर बात करना हमारे और समाज के लिए दोनो के लिए बहुत जरूरी है। ताकी लोग समझे और जाने।

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Misogyny क्या है?

 “Misogyny” शब्द प्राचीन ग्रीक शब्द “mīsoguníā”से लिया गया है जिसका अर्थ है महिलाओं के प्रति घृणा। मिसोगिनी ने के कई रूप हैं  जैसे पुरुष विशेषाधिकार, पितृसत्ता, लैंगिक भेदभाव, यौन उत्पीड़न, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, यौन ऑब्जेक्टिफिकेशन।  इसका प्रारंभ कहाँ से हुआ इस बात का पता  प्राचीन ग्रीक पौराणिक कथाओं से लगाया जा सकता है। हेसियोड के अनुसार महिलाओं के अस्तित्व में आने से पहले, पुरुष शांति से सहवास कर रहे थे,

जब तक कि प्रोमिथियस ने भगवान से आग के रहस्य को चोरी करने का फैसला नहीं किया, जिससे जीसस को गुस्सा आया और उन्होंने मानव जाति को इसका दंड दिया कहा जाता है की वो एक महिला थी जो दंडस्वरूप एक बॉक्स लेकर आई  जिसमें सभी बुराइयाँ जैसे श्रम, बीमारी, बुढ़ापा और मृत्यु शामिल थी। 

isse jarur padhe- Hathras case

“मिसोगिनी” का प्रारंभ कहाँ से हुआ – 

पौराणिक कथाओं में महिलाओ के बारे में अलग अलग विचार हैं हार धर्म का महिलाओं को लेकर अपना द्रष्टिकोण है | अगर हिन्दू धर्म की बात करें तो कई वेदों में महिलाओं को सर्वोच्च देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है | भगवान् शिव का भी एक अवतार अर्धनारीश्वर का माना गया है | पर वहीँ मनुस्मृति में माँ की भूमिका केवल माँ ,पत्नी और बेटी तक सीमित बताई गई है | लैटिन ईसाई धर्म के पिता टर्टुलियन ने कहा कि एक महिला होना ईश्वर द्वारा दिया गया एक अभिशाप है और वे शैतान का प्रवेश द्वार हैं। 

इस्लाम में, पवित्र पुस्तक कुरान में अध्याय-4  है, जिसका अर्थ है ‘अन-निसा’ अर्थात महिला। 

 इस्लाम की इस पुस्तक में यह बताया गया है कि पुरुष महिलाओं के प्रभारी है और जो स्त्रियाँ पति की आज्ञाकारी हैं और पति के अनुसार रहती हैं वो पवित्र हैं अन्यथा वो दंड की अधिकारी हैं | 

सदियाँ बीत गई पर आज भी नारियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार ही होता है | समान  कार्य के लिए महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन दिया जाता है | आज भी कई धार्मिक स्थानों में महिलाओ को प्रवेश की अनुमति नहीं है | महिलाओं  आज भी पुरुषों के समान शिक्षा और रोज़गार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता |
महिलाओं को लेकर घृणा किस हद तक है इसका एक उदाहरण हम सोशल मीडिया पर महिलाओं को लेकर प्रचलित मीम्स और मज़ाक को देख सकते हैं |  

 

महिलाओं से घृणा वालों की  मनोवृति  –  

इनकी पहचान करना इतना आसान नहीं है ये हमारे चारो ओर  हैं , कई बार तो इन्हें पता नहीं होता उनके मन में महिलाओं के प्रति घृणा व्याप्त है क्युकि समय के साथ लोगो के मन में यह एक सामान्य विचारधारा की तरह बस जाती है | कई बार माँ के अपमानजनक व्यवहार , प्रेमिका से मिला धोखा या किसी अन्य महिला के अनुचित व्यवहार से मन में घृणा के बीज उत्पन्न हो जाते हैं | 

  • स्टोडर्ड के अनुसार, “वे महिलाओं को वस्तुओं के रूप में देखते हैं और उनके साथ यौन संबंधों में संलग्न होने का हकदार महसूस करते हैं। उनका मानना ​​है कि जो महिलाएं उन्हें अस्वीकार करती हैं, वे दुष्ट हैं और महिलाओं द्वारा अस्वीकार किए जाने में उनकी भूमिका की जिम्मेदारी नहीं लेते हैं – यह भूमिका महिलाओं के प्रति उनके सेक्सिस्ट दृष्टिकोण के कारण है। “
  • हमारा समाज पुरुष प्रधान है जहाँ पुरुषों को लगता है कि  वे विशेषाधिकार के हकदार हैं, एक पुरुष  का काम है पैसा कमाना,” और “घर और परिवार की देखभाल करना महिलाओं  का काम है| अगर कोई स्त्री इस सोच का विरोध करती है तो वह पुरुषों के एहम के चलते उनकी घृणा की पात्र बन जाती हैं | उसके चरित्र पर संदेह किया जाता है | उसे हर प्रकार से प्रताणित करने के प्रयास किये जाते हैं | इस सोच के चलते पुरुष महिलाओं को हीन समझने लगते हैं | 
  • बड़ते हुए महिला अपराध जैसे घरेलु हिंसा , बलात्कार आदि के लिए आज भी कड़े क़ानून नहीं है और तो और क़ानून बनाने वाले अक्सर महिलाओ का मज़ाक उड़ाते दिख जाते हैं | हमारे देश में तो ऐसे नेता भी है जो बलात्कार होने पर महिला के साथ सहानभूति न दिखाकर इसे मर्दानगी का प्रदर्शन बता देते हैं | बलात्कार करने वाला खुलेआम घूमता है और प्रताणित महिला को समाज से निष्काषित कर दिया जाता है | इसके काई उदाहरण समाज में मौजूद है उत्तर प्रदेश  हो या दिल्ली पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ कोई फर्क नहीं पड़ता इस एक बिंदु पर आकर सभी महिलायें समान हो जाती हैं | अगर सरकारी तथ्यों पर विश्वास करे तो देश में लगभग 90 % महिलाए किसी न किसी रूप में प्रताणित की जा रही है | ज्यादातर केसों में अपराधी कोई रिश्तेदार या जान पहचान वाला ही होता हैजो महिलाओं को प्रताणित करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते हैं और इससे उनके पुरुषत्व को सुकून मिलता है | 

  Misogyny अपराधी कौन – 

भारत में, यौन हिंसा दंडनीय अपराध है।बलाताकर में केवल वही पुरुष ज़िम्मेदार नहीं होते जिन्होंने यह कृत्य किया होता है बल्कि वो जो इस घटना को छुपाने में उनका साथ देते हैं वो भी बराबरी से दोषी है | क्या पुरुषों को इस अपराध की घटना को रोकने के लिए जिम्मेदार नहीं होना चाहिए? क्या पुरुषों को इस बात से परेशान नहीं होना चाहिए कि उनकी मां, बहनें, पत्नियां और बेटियां लगातार असुरक्षित महसूस करती हैं या उन्हें लगता है कि बलात्कार से बचने के लिए उन्हें एक विशेष तरीके से कपड़े पहनना और व्यवहार करना पड़ता है?   क्या पुरुषों को महिलओं के सम्मान की शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए ?

अगर देश में महिलाओं को लेकर अपराध बड रहे हैं तो इसमें काफी हद तक महिलायें भी ज़िम्मेदार हैं | हम अपनी ही नवजात बेटियों को मारते हैं, हम अपने बेटों की पत्नियों का सम्मान नहीं  करते हैं , कई बार तो कन्या के जन्म के बाद  उन महिलाओं को अस्वीकार कर दिया जाता है | जो महिलायें अपनी शर्तों पर जीना चाहती है ,सुंदर दिखना चाहती है या हमेशा बन संवर कार रहती हैं उनके चरित्र पर संदेह किया जाता है  |लड़कियों को पैदा होने के बाद से ही विवाह के लिए ताने मिलना शुरू हो जाते है जैसे कन्या जन्म का एकमात्र उद्देश्य विवाह ही हो | माताएं अपने बेटों को शुरू से ही उन्हें उच्च होने की सीख देती हैं | ये सब अपराध की श्रेणी में नहीं आते पर इनका दूरगामी परिणाम किसी न किसी अपराध के रूप में होता है | 

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महिला अधिकारों के प्रति समाज का बदलता रवैया – 

वैसे तो महिलाओं की आवाज़ उठाने के लिए कई आन्दोलन हुए हैं और होते भी रहेंगे | अब महिलाए भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो चुकी हैं | युवाओं की सोच भोई बदल रही है इसका उदाहरण निर्भया केस ,जेसिका केस इन्साफ की लड़ाई में युवा वर्ग की भूमिका | 

इसके साथ ही सेना में , राजनीति में महिलाओं की भूमिका लगातार मज़बूत हो रही है | 

 

आज जितनी आवश्यकता महलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की है उतनी ही आवश्यकता पुरुषों को महिलाओं का सम्मान सिखाने की हैं | माता –पिता का फ़र्ज़ है कि वो अपने बेटे ओत बेटियों को  एक समान शिक्षा , संस्कार दे | तभी हम एक सभ्य समाज का निर्माण कर पायेंगे जहाँ हमारी बेटियाँ डर कर नहीं सम्मान से जी पाएंगी |

 

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